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✔ Fact-checked 2026-10-19 🏛 GREEN AGRICULTURE MISSION ⏱ 2 Min Read

PM PRANAM Scheme 2026: रासायनिक खाद कटौती पर 50% सरकारी बचत अनुदान व बायो-उर्वरक संबल

📅 प्रकाशित: 2026-10-19
🌐 भाषा: हिंदी (Hindi)
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⚡ 30 सेकंड में समझें — मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)
  • योजना श्रेणी / विभाग: GREEN AGRICULTURE MISSION
  • मुख्य लाभ व उद्देश्य: रासायनिक खाद कम करने पर राज्यों व पंचायतों को 50% बचत अनुदान और मृदा पोषण
  • ध्यान दें: राशि, तारीख और पात्रता बदल सकती है — आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर पुष्टि करें।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा शुरू की गई पीएम प्रणाम योजना (PM-PRANAM - Promotion of Alternate Nutrients for Agriculture Management Yojana) 2026 देश की कृषि भूमि को अत्यधिक रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी) के दुष्प्रभाव से बचाने, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने और जैविक व जैव-उर्वरकों (Bio-fertilizers) को बढ़ावा देने की एक क्रांतिकारी पहल है। इसके तहत रासायनिक खादों की बचत से बचने वाली सब्सिडी का 50% हिस्सा सीधे राज्यों और ग्राम पंचायतों को अनुदान के रूप में वापस दिया जाता है।

1. पीएम प्रणाम योजना का वित्तीय मॉडल और किसानों को लाभ

योजना के अंतर्गत मुख्य विशेषताएं और प्रोत्साहन:

  • 50% सब्सिडी बचत का सीधा राज्य अनुदान: यदि कोई राज्य पिछले तीन वर्षों की औसत खपत की तुलना में रासायनिक यूरिया या डीएपी की खपत में कमी लाता है, तो केंद्र सरकार द्वारा बचाई गई सब्सिडी राशि का 50% हिस्सा उस राज्य को विशेष अनुदान के रूप में मिलता है।
  • किसानों व पंचायतों को 70% फंड आवंटन: राज्य को मिलने वाले इस अनुदान का 70% हिस्सा ग्राम पंचायत स्तर पर वैकल्पिक उर्वरक उत्पादन इकाइयों, वर्मी-कम्पोस्टिंग और किसानों को रियायती बायो-उर्वरक उपलब्ध कराने पर खर्च किया जाता है।
  • नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को बढ़ावा: पारंपरिक 45 किग्रा यूरिया की बोरी के स्थान पर 500 मिलीलीटर की नैनो यूरिया बोतल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की गुणवत्ता बढ़ती है।
  • मृदा स्वास्थ्य और भूजल सुरक्षा: अत्यधिक रासायनिक खादों से बंजर हो रही मिट्टी की उर्वरकता सुधरती है और भूजल प्रदूषण में कमी आती है।

2. वैकल्पिक उर्वरक अपनाने पर किसानों को मिलने वाली सुविधाएं

किसान स्तर पर योजना के व्यावहारिक लाभ:

  1. ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS) और किसान समृद्धि केंद्रों पर रियायती दरों पर नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खाद उपलब्ध कराई जाती है।
  2. कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) द्वारा सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर सटीक पोषक तत्व उपयोग का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।
  3. प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसान समूहों (FPOs) को बायो-कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने हेतु प्रत्यक्ष वित्तीय अनुदान दिया जाता है।

3. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या पारंपरिक यूरिया पर मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाएगी?
उत्तर: नहीं, पारंपरिक यूरिया पर किसानों को मिलने वाली वर्तमान सब्सिडी जारी रहेगी। पीएम-प्रणाम का उद्देश्य सब्सिडी घटाना नहीं, बल्कि वैकल्पिक व संतुलित उर्वरक अपनाकर मिट्टी को स्वस्थ बनाना है।

Q2. नैनो यूरिया के उपयोग से क्या लाभ होता है?
उत्तर: नैनो यूरिया सीधे पौधों की पत्तियों द्वारा 80% से अधिक अवशोषित होता है, जिससे उपज बढ़ती है और परिवहन व भंडारण में भारी सुविधा होती है।

📍 अपने राज्य की अन्य कृषि व किसान कल्याण योजनाएं देखें →
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राजेश कुमार
सत्यापित शोधकर्ता एवं लेखक

राजेश कुमार

पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ एवं सरकारी योजना शोधकर्ता। भारतीय नागरिकों तक पारदर्शी, सत्य और आधिकारिक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए समर्पित। तथ्य-जांच नीति देखें →